10 years of cutting the chai

एक कहानी, बस यूं ही (आखरी भाग)

Girl Walking Away

(Continued from here) स्थान- जयपुर, कॉफी शॉप, बैकग्राउंड में गीत किस मोड़ पर जाते हैं, कुछ सुस्त कदम रस्ते,कुछ तेज कदम राहें सुस्ती कदमों की हो तो उन्हें तेज़ किया जा सकता है पर जब राहें गुम सी लगने लगे तो क्या किया जाए तो उन राहों को गुलजार कर लिया जाए एक अच्छी कंपनी [Read more]

एक कहानी, बस यूं ही (भाग चार)

Coffee

(Continued from here) स्थान – उस लड़के का घर माँ की आवाज़ के साथ नींद खुली। आवाज़ नहीं फटकार। फटकार कि मैं फिर रात भर म्यूजिक सिस्टम ऑन करके सो गया। माँ बुदबुदा रही थी। बिजली का बिल इतना इतना आता है नवाब को चिंता नहीं। 5 साल हो गए टोकते टोकते। पहले तो कुछ [Read more]

एक कहानी, बस यूं ही (भाग तीन)

(Continued from here) स्थान – जयपुर, उस लड़की का घर, रात का वक्त। चियर्स चियर्स… मस्त पार्टी है यार। कब से इंतज़ार था इस पार्टी का। 5 साल हो गए यार तुझे इस शहर में आए, इस ऑफिस में काम करते। कंजूस कहीं की, अब दी है पार्टी, पता नहीं कहां खोई रहती है तू। [Read more]

एक कहानी, बस यूं ही (भाग दो)

Guzar

(Continued from here) गुलज़ार के गाने आज भी जब भी सुनता हूँ। तुम्हारा साथ याद आ जाता है। तुम्हारा गुनगुनाता चेहरा। गुनगुनाते लब, चित्रा सिंह की आवाज़ से आवाज़ मिलाती तुम्हारी आवाज़। कभी कहा नहीं पर, तुम अच्छा गाती हो। बहुत अच्छा। उस पर गाने के किसी शब्द या लाइन में मैं गलत बोल गुनगुना [Read more]

एक कहानी, बस यूं ही

An isspecial cutting chai to mark 10 years of Cutting the Chai specially brewed by the Chaiwali, Varsha Choudhury. A not-so-long story, but in many parts. The beginning: बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने हमारी थोड़ी सी बेवफाई… बस में सफ़र के दौरान जब रेडियो पर ये गाना सुना तो होठों पर मुस्कान खिल गई। मन [Read more]

10 years of Cutting the Chai: A decade of moulding the digital clay

10 years of Cutting the Chai

2005 – it seems like so long a time ago (in fact, it is). Only birds tweeted back then and Facebook was ‘Thefacebook’ confined to a few elite US colleges. BlackBerry defined the smartphone. I was at my first job and one summer morning – on May 29, 2005 to be precise – signed up [Read more]